गीतों से भर दे |
दीप-ज्यौति के पावन पर्व पर,
माँ मुझको ऐसा वर दे |
उज्जवल वस्त्र, सुरभित तन-मन,
सरस-मलाई मधुमय-व्यंजन दे |
तिमिर छट जीवन ज्योतिर्मय हो जाये
ऐसा सुरभित मधुवन, घर-आँगन दे |,
आगंतुक का स्वागत करने
अपनापन हो,
ऐसा मुझको मन-मयूर दे |
ध्यान करू तुझको और-
आनंदित करू जन-जन को,
ऐसा कोकिल कंठी स्वर देकर मेरे मन को गीतों से भर दे |
- लक्ष्मण लडीवाला
कृष्ण-साकेत,165 गंगोत्री नगर,
गोपालपुरा ब्य्पस, टोंक रोड,जयपुर-18