Saturday, November 26, 2011

-आदमी का मर जाना

     प्रसंग :-आदमी का मर जाना 
जिस्म ही मरा है मिटटी का, मिट्टीमे मिला है, 
गणपति को भी तो आखिर जीवन दान मिला है 
आँखे गवाह है मन ने कष्ट उठाकर,अपनी जान दी है 
दिल अभी अमर है हिम्मते मरदे मददे खुदा है |
सति सावित्री का इतिहास अभी पन्नो में जुदा है, 
मरण भीती को भी वह हर सकती है सबको पता है 
अंजना माता को वापिस मारुती ले आये पढ़ा है  
पितृलोक से अंगद को भीतारा के गर्भ आना पड़ा है 
जनम-मरण का यह सिलसिला जनम-जनम का है, 
फिर क्यों जाने वाले पर रोने-धोने का चलन चला है | 
-by लक्ष्मण लडीवाला
१६५,गंगोत्र्ती नगर,जयपुर३०२०१८

Friday, November 25, 2011

अंगद के पाव-सा अड़ गया

                 

अंगद के पाव-सा अड़ गया  

गाँधी बाबा का प्रयोग सफल हो गया  
सत्य अहिंसा के बल पर जब  
पराधीन भारत स्वतंत्र हो गया.।  
गाँधी तो क्या,बाबा भीमराव को भी  
नही पता था- भारत का जन-तन्त्र  
भ्रष्‍ट-तन्त्र मे बदल जाएगा  
गोपाल कृष्ण की गऊ का चारा 
दो पाँव वाला ही चर जाएगा ।
अति सर्वत्र वर्जते  
अब फिर एक ईमानदार आदमी अड़गया  
गाँव-गाँव ढाणी-ढाणी  
जन-जन को जगा गया  
देश के युवाओ को नयी राह दिखा गया  
सोशल नेटवर्किंग का सफल प्रयोग हो गया|  
फिर एक ईमानदार आदमी अड़ गया, 
जान माल के नुकसान और  
सड़क-रेल जाम किए बिना  
सफल आंदोलन करने का  
"अन्ना-गिरी" शस्त्र दे गया|  
जन-बल के आगे भ्रष्‍ट-तंत्र झुक गया  
संसद भी एक स्वर से सेलयूट (सलाम) कर गया-  
जब ईमानदार अन्ना -  
अंगद के पाँव सा अड़ गया|  
कृष्ण-वन्दे जगदगुरु" विवेक-आनंद से  
एक बार फिर सर्व सिद्ध हो गया|  
जब एक ईमानदार आदमी 
अंगद के पाँव सा अड़गया!!
- लक्ष्मण प्रसाद लड़ीवाला  
"कृष्णा-साकेत", 165,गंगोत्री नगर, 
गोपालपुरा बाईपास,टोंकरोड, 
जयपुर (राजस्थान)-302018 
मो.- 9314249608