प्रसंग :-आदमी का मर जाना
जिस्म ही मरा है मिटटी का, मिट्टीमे मिला है,
गणपति को भी तो आखिर जीवन दान मिला है
आँखे गवाह है मन ने कष्ट उठाकर,अपनी जान दी है
दिल अभी अमर है हिम्मते मरदे मददे खुदा है |
गणपति को भी तो आखिर जीवन दान मिला है
आँखे गवाह है मन ने कष्ट उठाकर,अपनी जान दी है
दिल अभी अमर है हिम्मते मरदे मददे खुदा है |
सति सावित्री का इतिहास अभी पन्नो में जुदा है,
मरण भीती को भी वह हर सकती है सबको पता है
मरण भीती को भी वह हर सकती है सबको पता है
अंजना माता को वापिस मारुती ले आये पढ़ा है
पितृलोक से अंगद को भीतारा के गर्भ आना पड़ा है
जनम-मरण का यह सिलसिला जनम-जनम का है,
फिर क्यों जाने वाले पर रोने-धोने का चलन चला है |
-by लक्ष्मण लडीवाला
१६५,गंगोत्र्ती नगर,जयपुर३०२०१८