जागरूक कर जाय
लूट व् भ्रष्टाचार से, भरा पड़ा अखबार,
ह्त्या, बलात्कार की, ख़बरे है भरमार ।
घोटालों भरमार है, जनता को सब भान
जाँच करा बसते भरे,ये सरकार की शान ।
सुर्खियों में रहना ही, नेता समझे शान,
चर्चा में हरदम रहे, नेता उसको जान ।
खबर गर मजेदार है ,सच की क्या दरकार
संस्कृति व साहित्य से, नहीं अब सरोकार ।
जनहित सोंच खबर छपे, इसकी ही दरकार,
जनजन को चेतन करे,वह असली अखबार ।
जनता में जागृति भरे, खबर सजग करजाय,
जनसत्ता को सजग करे, चौथा स्तम्भ बताय ।
जनहित में खबरे छपे, इसकी ही दरकार,
जनजन को चेतन करे,वह असली अखबार ।
-लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला