"सफर का सच --- 27"
जयपुर के प्रतिष्ठित परिवार में 19-11-1945 में जन्म लेने के 2 वर्ष बाद ही दाहिनी जांघ में गंभीर चोट लगने के कारण 5 वर्ष अस्पताल में रहा और 7 वर्ष की उम्र में 6 माह जोशी से पढ़कर दूसरी,तीसरी के बाद सीधें 6 टी कक्षा में दाखिला लेकर 1962 में हाई स्कूल, १९६४ में १२वी कर घर की दयनीय दशा के कारण क्लर्क की नौकरी की | सेवा में रहते बी.कॉम,डिप.काष्ट अकाउंटेंसी, एम् कॉम,C.S (inter) किया, फिर प्रतियोगिता परीक्षा पास कर कलक्टर,जयपुर, और राज विधान सभा से 2003 में लेखाकार पद से सेवा निवृत हुआ | अग्रवाल समाज के महमंत्री पद पर जयपुर में दहेज विरोधी प्रदर्शन के कारण रिश्तेदारों को कोप भाजन सहना पडा | “कृष्णा शाही दहेज़ विरोधी संसदीय समिति’ को ज्ञापन देकर “दहेज को कोग्निजेबल आफेंस बनवाने की पुरजोर वकालत को समिति ने सराहा | 1967 विवाह हो गया |
विद्यार्थी जीवन में “वाणिज्य में साहत्य का महत्त्व” व अगले वर्ष “व्यवहाय में कला” निबंध प्रतियोगिता में पुरस्कृत हुआ | 1972 में राजस्थान पत्रिका में लाला लाजपत राय पर लेख, व 1975 में दैनिंक राष्ट्रदूत में “एन सी सी डे पर लेख प्रकाशित होने पर उत्साह बढ़ा |1975से 1978 तक अग्रगामी मासिक का सहसंपादक दायित्व निर्वाह किया | शारीरिक विकलांगता, नौकरी और गृहस्थ जीवन में व्यस्तता के चलते लेखन कार्य अवरुद्ध रहा पर धर्मयुग.और इलेस्ट्रेटेड वीकली पढना नहीं छोड़ पाया | 2009 में बच्चे कम्प्यूटर लाये तो फेसबुक पर समय व्यतीत करने लगा तब दो चार रचना देख कुछ मित्र बने और तब मात्राओं के ज्ञान बगैर मै पहले जो भी लखता रहा उस पर हँसी ही नहीं रोना आने लगा | openbooks online.com पर आद अम्बरीश श्रीवास्तव,सौरभ पाण्डेय,प्र.सम्पादक योगराज प्रभाकर डॉ प्राची सिंह और फिर फेसबुक पर श्री रघुविन्द्र यादव,श्री ओम नीरव जी सहित सभी मित्रों का स्नेह मिलता गया और मेरे दोहे,रोले, कुण्डलिया, गीत, आदि छंदों पर भरपूर स्नेह से उत्साहवर्धन हुआ | एकल काव्यपाठ एवं एकल साहित्य मंच के श्री सुरेन्द्र नवल जी, सिया कुमार जी ने मेरे दोहों पर, व क्षणिकाओं को प्रथम पुरस्कृत किया | अब साहित्य रागिनी, बाबूजी का भारत मित्र, व साहित्य सरोज आदि पत्रिका में रचनाएं प्रकाशित हो रही है | यह सब प्रभु की कृपा और सहहृदयी साथियों के सहयोग का परिणाम है |
- लक्ष्मण रामानुज लडीवाला , जयपुर
विद्यार्थी जीवन में “वाणिज्य में साहत्य का महत्त्व” व अगले वर्ष “व्यवहाय में कला” निबंध प्रतियोगिता में पुरस्कृत हुआ | 1972 में राजस्थान पत्रिका में लाला लाजपत राय पर लेख, व 1975 में दैनिंक राष्ट्रदूत में “एन सी सी डे पर लेख प्रकाशित होने पर उत्साह बढ़ा |1975से 1978 तक अग्रगामी मासिक का सहसंपादक दायित्व निर्वाह किया | शारीरिक विकलांगता, नौकरी और गृहस्थ जीवन में व्यस्तता के चलते लेखन कार्य अवरुद्ध रहा पर धर्मयुग.और इलेस्ट्रेटेड वीकली पढना नहीं छोड़ पाया | 2009 में बच्चे कम्प्यूटर लाये तो फेसबुक पर समय व्यतीत करने लगा तब दो चार रचना देख कुछ मित्र बने और तब मात्राओं के ज्ञान बगैर मै पहले जो भी लखता रहा उस पर हँसी ही नहीं रोना आने लगा | openbooks online.com पर आद अम्बरीश श्रीवास्तव,सौरभ पाण्डेय,प्र.सम्पादक योगराज प्रभाकर डॉ प्राची सिंह और फिर फेसबुक पर श्री रघुविन्द्र यादव,श्री ओम नीरव जी सहित सभी मित्रों का स्नेह मिलता गया और मेरे दोहे,रोले, कुण्डलिया, गीत, आदि छंदों पर भरपूर स्नेह से उत्साहवर्धन हुआ | एकल काव्यपाठ एवं एकल साहित्य मंच के श्री सुरेन्द्र नवल जी, सिया कुमार जी ने मेरे दोहों पर, व क्षणिकाओं को प्रथम पुरस्कृत किया | अब साहित्य रागिनी, बाबूजी का भारत मित्र, व साहित्य सरोज आदि पत्रिका में रचनाएं प्रकाशित हो रही है | यह सब प्रभु की कृपा और सहहृदयी साथियों के सहयोग का परिणाम है |
- लक्ष्मण रामानुज लडीवाला , जयपुर
