हम अब है आजाद ?
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काट भुजा इस देश की, किया हमें आजाद,
चुभते अंतस शूल से, मन में है अवसाद |
गांधी के इस देश में, हिंसा है आबाद,
निरपराध है जेल में, अपराधी आजाद ?
भ्रष्टाचारी कर रहे, भारत को बर्बाद,
देश भक्त कैसे कहे,हम अब है आजाद |
संत वेष में घूमते, दुष्कर्मी आजाद,
नारी पीड़ा सह रही, लिए हुए अवसाद |
फैलाते है गंदगी, करते खूब विवाद,
नेताओं की मसखरी, जनता में अवसाद |
राजनीति के मंच पर, अपराधी है आम,
संसद है उनके लिए, जन्नत जैसा धाम |
न्याय-पालिका से करे, जनता ये फ़रियाद,
बची जहां कुछ शेष है, आजादी की खाद |
जनता के ही वोट से, लोकतंत्र आबाद,
भारत माँ को रख सके, जनता ही आजाद |
-लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला
११-११-२०१३