Tuesday, November 19, 2013

हम अब है आजाद ? (दोहे)

हम अब है आजाद  ?
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काट भुजा इस देश की, किया हमें आजाद,
चुभते अंतस शूल से, मन में है अवसाद  | 

गांधी के इस देश मेंहिंसा है आबाद,
निरपराध है जेल मेंअपराधी आजाद ?

भ्रष्टाचारी कर रहेभारत को बर्बाद,
देश भक्त कैसे कहे,हम अब है आजाद  |

संत वेष में घूमतेदुष्कर्मी आजाद,
नारी पीड़ा सह रहीलिए हुए अवसाद |

फैलाते है गंदगी,  करते  खूब  विवाद,
नेताओं की मसखरीजनता में अवसाद  |

राजनीति के मंच परअपराधी है आम,
संसद है उनके लिएजन्नत जैसा धाम |

न्याय-पालिका से करेजनता ये फ़रियाद,
बची जहां कुछ शेष हैआजादी की खाद |

जनता के ही वोट सेलोकतंत्र आबाद,
भारत माँ को रख सकेजनता ही आजाद |

-लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला 
११-११-२०१३

तुम मेरे आधार (दोहे)

तुम मेरे आधार (जन्म दिवस पर विशेष)

अडसठ बसंत गुजारे, पाकर सबका प्यार
गुरुवर अरु माँ-बाप का, वरदहस्त आधार |

सद्गुरु को मै दे सकूँ, ऐसी क्या सौगात, 
चरण पखारूँ अश्क से,इतनी ही औकात |

समर्पण निःशेष रहे, तुम मेरे आधार,
तुमसे तुम्हे मांग लू,करे अगर स्वीकार | 

जन्म दिवस पर दे रही,माँ मुझको आशीष 
सद्कर्मी पथ पर चलूँ, भला करे जगदीश | 

घर पर सब मिलजुल रहे, एक दूजे के संग 
घर पर यूँ खिलते रहे, प्रेम प्रीत के रंग |

मर्यादित जीवन रहे,रहे न चिंता युक्त 
अपना ये जीवन रहे, बुरे काम से मुक्त |

पत्नी मेरी जिन्दगी, बच्चे मेरा प्यार,
जुड़े रहे हर हाल में, इनसे मेरे तार |

सुधीजनों से मिल रहा, मुझको सचमुच प्यार
मुक्त ह्रदय से मानता,मै सबका आभार  |

प्रभु भक्ति में लीन रहूँ, मन पर रहे न  बोझ,
बनी रहे ओकात ये, करू  प्राथना  रोज  | 

-लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला 
दिनांक 19 नवम्बर, 2013