औरत की क़ुरबानी
औरत वही जो औरों के हित देती अपनी क़ुरबानी
नारी जीवन शीतल सा पानी और चंदा सी चांदनी ||
औरों के हित रत, खुद का तन तपता रेगिस्तानी
आदमी का भ्रूण सहर्ष सैहती दे अपनी बच्चेदानी ||
औरत त्याग की मूरत, ढक घूँघट में अपनी सूरत
थकी-हारी मशीनरी सी करती सबकी पूरी जरुरत ||
अबला नहीं है औरत मत कुचलों कलियों का अरमान
अहिल्या औ लक्ष्मी बाई का देख चुके हम बलिदान ||
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लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला ,जयपुर