Saturday, December 24, 2011

गीता उपदेश

                 गीता उपदेश 
गीता वास्तव में ही सार्वभौम मानव ग्रन्थ है 
यह न हिन्दू मुस्लिम या सिक्ख का पंथ है 
यह तो जीवन का गीत है जीवन का संगीत है 
गीता आज की कृति है आज की आवशकता है 
गीता में कर्म का राज है गीता एक रास्ता है 
गीता एक दर्शन है गीता सदाचार सोपान है 
गीता मानव मात्र प्रगति का पथ प्रदर्शक है 
गीता एक सन्देश है इसके उपदेश सार्थक है 
गीता में मानव मात्र का कल्याण निहित है 
इसमें कृष्णं-वन्दे जगतगुरु ज्ञान समाहित है 
इसका विरोध कोई अज्ञानतावश ही करता है  
ईश्वर भला करे वह इसका प्रसार ही करता है 
रचना-लक्ष्मण लडीवाला, जयपुर दि २५.१२.11

Monday, December 19, 2011

मंजिल मेरी कहाँ थी

          मंजिल मेरी कहाँ थी 
मंजिल मेरी कहाँ थी मुझे पता नहीं 
पर मंजिल तक का सफ़र जो कियां 
घर, स्कूल, अस्पताल के रास्ते होते
अपनों के कन्धों पर शमशान तक जाते 
पल-पल घटे जीवन को मेने जिया |
अपनों ने मुझे क्या दिया नहीं दिया 
मुझे नहीं मालूम 
किन्तु मै कुछ नहीं दे पाया, 
मेरी ओर से जो भी कुछ दिया, 
जिसका सबकुछ था उसी ने दिया 
मुझ पर उसने बडाही अहसान किया:
मंजिल मेरी कहाँ थी उसका पता नहीं दिया   
द्वारा- लक्ष्मण लडीवाला, जयपुर
165,gangotri Nagar Gopalpura Bypass
Tonk Road, JAIPUR Mob 9314249608 

चहरे की रौनक होती है बेटियां


  चहरे की रौनक होती है बेटियां 

वैसे तो बेटे और बेटियां दोनों ही है-
 मां-बांप के चेहरे की रौनक 
मगर पहले बचानी होगी-
जो है  घर- घर की आबरू-
खुशबु
खुशबू  नहीं होगी तो-
 फूल, फूल नहीं कहलायेगा 
खुशबु और आबरू रहेगी तो-
 फूल और उग, फल-फूल जायेंगा |
घर के आँगन में अगर फूल-
  खुशबू महकाएगा ,
खुशबू भरे फूलों को माली-
 माला में पिरो सुन्दर माला बनायेंग |
माला प्रभु के गले में -
शोभा बढ़ा इठलाएंगी |
फूलों  पर भँवरे मंडराएंगे-
गुन-गुन  गाना गायेंगे |
फूल फूल पर रंग बिरंगी-
 तितलियाँ-
उडतो फिरती-
 रस चूमती नजर आएँगी |

रचनाकर - लक्ष्मण लडीवाला, जयपुर 

Saturday, December 17, 2011

एक आश्वासन भगवन भक्त का

एक आश्वासन भगवन भक्त का --
मुझे सुनाई दी, बोली मुझसे मेरी आत्मा 
पढ़ले तू वेद, पुराण या कुरान कलमां|
मै बैठा हूँ गिरजाघर और मंदिरों में, 
 मिलजाएँगी परछाई गुरुद्वारों मस्जिदों में: 
कण कण में, ख्वाईशो में,इश्क की फरमाईशोमे
प्यार दिल से करों तो मै मिलूंगा सोहीणी-महिवाल में 
सच मानो मै मिलूँगा हीर-राँझा औ शिरिन फ़रहाद में | 
द्वारा - लक्ष्मण लडीवाला, जयपुर दि. 17-12-11  

Monday, December 12, 2011

अमर करजाओ

      संतो ने  सही कहा है जीवन मरुस्थल नहीं है हमारा 
जीवन शास्वत सत्य है जीवन इश्वर की प्यारी दें है |
जीवन जीने का नाम है, जीवन में सार है, अरमान है 
वापस ला सकता है जो थे हमारे अपने, हमारे सपने 
बगैर आडम्बर के पूरी हो सकती है आकांक्षाए सपने |
भरोसा करना होगा, सजगता से साथ साथ चलना होगा 
सुनहरे सपनो को आँखों मेंगहरे से सजाना होगा, 
अमली जामा पहनाने की लगन से कृत्य करना होगा 
अपने आप को, अपने परिवार को , समाज को 
अपने देश को और समग्र संसार को कुछ दे जाओ.
 जीवन को सफल और सदा के लिए अमर करजाओ|
रचनाकर - लक्ष्मण लडीवाला, जयपुर 

Friday, December 9, 2011

जीवन मरुस्थल नहीं है हमारा

जीवन मरुस्थल नहीं है हमारा 
जीवन शास्वत सत्य है जीवन इश्वर की प्यारी दें है |
जीवन जीने का नाम है, जीवन में सार है, अरमान है 
वापस ला सकता है जो थे हमारे अपने, हमारे सपने 
बगैर आडम्बर के पूरी हो सकती है आकंशाए सपने |

भरोसा करना होगा, सजगता से साथ साथ चलना होगा
सुनहरे सपनो को आँखों मेंगहरे से सजोने होगा,
अमली जामा पहनाने की लगन से कृत्य करना होगा-

By LAXMAN LADIWALA, JAIPUR