Saturday, December 24, 2011

गीता उपदेश

                 गीता उपदेश 
गीता वास्तव में ही सार्वभौम मानव ग्रन्थ है 
यह न हिन्दू मुस्लिम या सिक्ख का पंथ है 
यह तो जीवन का गीत है जीवन का संगीत है 
गीता आज की कृति है आज की आवशकता है 
गीता में कर्म का राज है गीता एक रास्ता है 
गीता एक दर्शन है गीता सदाचार सोपान है 
गीता मानव मात्र प्रगति का पथ प्रदर्शक है 
गीता एक सन्देश है इसके उपदेश सार्थक है 
गीता में मानव मात्र का कल्याण निहित है 
इसमें कृष्णं-वन्दे जगतगुरु ज्ञान समाहित है 
इसका विरोध कोई अज्ञानतावश ही करता है  
ईश्वर भला करे वह इसका प्रसार ही करता है 
रचना-लक्ष्मण लडीवाला, जयपुर दि २५.१२.11

No comments:

Post a Comment