मंजिल मेरी कहाँ थी
मंजिल मेरी कहाँ थी मुझे पता नहीं
पर मंजिल तक का सफ़र जो कियां
घर, स्कूल, अस्पताल के रास्ते होते
अपनों के कन्धों पर शमशान तक जाते
पल-पल घटे जीवन को मेने जिया |
अपनों ने मुझे क्या दिया नहीं दिया
मुझे नहीं मालूम
किन्तु मै कुछ नहीं दे पाया,
मेरी ओर से जो भी कुछ दिया,
जिसका सबकुछ था उसी ने दिया
मुझ पर उसने बडाही अहसान किया:
मंजिल मेरी कहाँ थी उसका पता नहीं दिया
द्वारा- लक्ष्मण लडीवाला, जयपुर
165,gangotri Nagar Gopalpura Bypass
Tonk Road, JAIPUR Mob 9314249608
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