चहरे की रौनक होती है बेटियां
वैसे तो बेटे और बेटियां दोनों ही है-
मां-बांप के चेहरे की रौनक
मगर पहले बचानी होगी-
मगर पहले बचानी होगी-
जो है घर- घर की आबरू-
खुशबु
खुशबू नहीं होगी तो-
फूल, फूल नहीं कहलायेगा
खुशबु और आबरू रहेगी तो-
खुशबु और आबरू रहेगी तो-
फूल और उग, फल-फूल जायेंगा |
घर के आँगन में अगर फूल-
घर के आँगन में अगर फूल-
खुशबू महकाएगा ,
खुशबू भरे फूलों को माली-
खुशबू भरे फूलों को माली-
माला में पिरो सुन्दर माला बनायेंग |
माला प्रभु के गले में -
शोभा बढ़ा इठलाएंगी |
फूलों पर भँवरे मंडराएंगे-
फूलों पर भँवरे मंडराएंगे-
गुन-गुन गाना गायेंगे |
फूल फूल पर रंग बिरंगी-
फूल फूल पर रंग बिरंगी-
तितलियाँ-
उडतो फिरती-
उडतो फिरती-
रस चूमती नजर आएँगी |
रचनाकर - लक्ष्मण लडीवाला, जयपुर
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