Sunday, February 1, 2015


"सफर का सच --- 27"
जयपुर के प्रतिष्ठित परिवार में 19-11-1945 में जन्म लेने के 2 वर्ष बाद ही दाहिनी जांघ में गंभीर चोट लगने के कारण 5 वर्ष अस्पताल में रहा और 7 वर्ष की उम्र में 6 माह जोशी से पढ़कर दूसरी,तीसरी के बाद सीधें 6 टी कक्षा में दाखिला लेकर 1962 में हाई स्कूल, १९६४ में १२वी कर घर की दयनीय दशा के कारण क्लर्क की नौकरी की | सेवा में रहते बी.कॉम,डिप.काष्ट अकाउंटेंसी, एम् कॉम,C.S (inter) किया, फिर प्रतियोगिता परीक्षा पास कर कलक्टर,जयपुर, और राज विधान सभा से 2003 में लेखाकार पद से सेवा निवृत हुआ | अग्रवाल समाज के महमंत्री पद पर जयपुर में दहेज विरोधी प्रदर्शन के कारण रिश्तेदारों को कोप भाजन सहना पडा | “कृष्णा शाही दहेज़ विरोधी संसदीय समिति’ को ज्ञापन देकर “दहेज को कोग्निजेबल आफेंस बनवाने की पुरजोर वकालत को समिति ने सराहा | 1967 विवाह हो गया |
विद्यार्थी जीवन में “वाणिज्य में साहत्य का महत्त्व” व अगले वर्ष “व्यवहाय में कला” निबंध प्रतियोगिता में पुरस्कृत हुआ | 1972 में राजस्थान पत्रिका में लाला लाजपत राय पर लेख, व 1975 में दैनिंक राष्ट्रदूत में “एन सी सी डे पर लेख प्रकाशित होने पर उत्साह बढ़ा |1975से 1978 तक अग्रगामी मासिक का सहसंपादक दायित्व निर्वाह किया | शारीरिक विकलांगता, नौकरी और गृहस्थ जीवन में व्यस्तता के चलते लेखन कार्य अवरुद्ध रहा पर धर्मयुग.और इलेस्ट्रेटेड वीकली पढना नहीं छोड़ पाया | 2009 में बच्चे कम्प्यूटर लाये तो फेसबुक पर समय व्यतीत करने लगा तब दो चार रचना देख कुछ मित्र बने और तब मात्राओं के ज्ञान बगैर मै पहले जो भी लखता रहा उस पर हँसी ही नहीं रोना आने लगा | openbooks online.com पर आद अम्बरीश श्रीवास्तव,सौरभ पाण्डेय,प्र.सम्पादक योगराज प्रभाकर डॉ प्राची सिंह और फिर फेसबुक पर श्री रघुविन्द्र यादव,श्री ओम नीरव जी सहित सभी मित्रों का स्नेह मिलता गया और मेरे दोहे,रोले, कुण्डलिया, गीत, आदि छंदों पर भरपूर स्नेह से उत्साहवर्धन हुआ | एकल काव्यपाठ एवं एकल साहित्य मंच के श्री सुरेन्द्र नवल जी, सिया कुमार जी ने मेरे दोहों पर, व क्षणिकाओं को प्रथम पुरस्कृत किया | अब साहित्य रागिनी, बाबूजी का भारत मित्र, व साहित्य सरोज आदि पत्रिका में रचनाएं प्रकाशित हो रही है | यह सब प्रभु की कृपा और सहहृदयी साथियों के सहयोग का परिणाम है |
- लक्ष्मण रामानुज लडीवाला , जयपुर
— with केदार नाथ शब्द मसीहा and 50 others.
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  • Deepika Dwivedi Deep आपका सफर के सच का आलेख पढ़ हमें ज्ञात हुआ कि हम इतने बड़े शख्स के साथ है निश्चित रूप से आप सहृदय व् सरल व्यक्तित्व् है जिसने आज से पहले कभी जाहिर नहीं होने दिया कि वो इतनी बड़ी हैसियत रखता है ,नमन आपको ...............
  • Deepika Dwivedi Deep आपने लिखा है आप पांच वर्ष तक अस्पताल में दाख़िल रहे ?तब निश्चित रूप से आप बहुत छोटे थे पर उस समय की धुंधली स्मृतियों में कहीं कुछ स्मरण आता हो तो हमें बताइये जिससे हम सभी हौसला प्राप्त कर सके व् सीख सके कि बुरे वक्त का सामना कैसे बहादुरी से करना चाहिए
  • Rajesh Kummar Sinha आ लक्ष्मण प्रसाद जी ,,आज इस सफर के माध्यम से आपकी शख्सियत को करीब से जानने का मौका मिला ,,आप प्रारम्भ से ही काफी जुझारू प्रवृति के रहे हैं ,साथ ही साहित्य के साथ साथ आप सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ भी लड़ते हैं,,प्रतिभा का ऐसा मणि कांचन संयोग कम ही देखने को मिलता है । कृपया यह बताने का कष्ट करें की आपको लिखने की प्रेरणा कैसे मिली ?सादर
  • Deepika Dwivedi Deep आप ने अल्पायु में क्लर्क की नौकरी से अपनी राजकीय सेवा करना प्रारम्भ कर आई ए एस पद तक पहुंचना वाकई आपके परिश्रमी ,दृढ -निश्चयी स्वभाव को दर्शाता है आपको सलाम करती हुई नई पीढ़ी को आप कहाँ पाते है वर्तमान भौतिक वादी युग में क्या बदलाव महसूस करते है ऐसा क्या संदेश देना चाहेगे जिससे हम सभी की जीवन की राह आसान हो सके
  • Surendar Nawal जीवन के तमाम उतार-चढ़ाव के बीच जीवन सफर को तय करते हुए आप जिस धैर्य एवं संयम के साथ आज इस मकाम पर पहुँचे हैं, उसका संक्षेप में बहुत सधा हुआ लेकिन सारी महत्त्वपूर्ण बातों को समाहित करता हुआ सधा हुआ आलेख आपने प्रस्तुत किया है... आपके इस आलेख से आपके सम्पू...See More
  • Deepika Dwivedi Deep आपको सबसे पहले लिखने की प्रेरणा कब व् कहाँ से मिली सम्भव हो तो हमें उस रचना का रसास्वादन करवादे साथ ही आपका प्रिय रचनाकार कौन है जिसे आप प्रेरक मानते है ?
  • Rekha Gupta aapka aalekh padha aur gyat hua ki jitana bada shkhs hota hai wah utana hi sahraday va somya hota hai . aapki sahhradya ki mai kayal hun
  • Subhash Saluja Laxmanprassd Ramaanuj Ladiwala ji आप का आलेख आप के प्रेरणादायी जीवन का चित्र हॆ ।आप के जीवन की उपलब्धियां किसी को भी प्रेरित करने के लिये प्रयाप्त हॆं । संघर्षकेे तप से निकला जीवन निश्चित ही उत्कृष्ट होता हॆ ।इस का प्रमाण आप का जीवन हॆ ।मॆं सादर नमन करता हूँ ।
  • Kavita Sud Laxmanprasad Raamaanuj Ladiwala आपका सफर का सच पढकर जीवन के एक नवीन परिप्रेक्ष्य से मानों परिचय हुआ। आपने अपने आलेख में बहुत ही सरल सहज शब्दावली में अपने जीवन आैर साहित्य के सफर को प्रस्तुत किया है। बालपन से ही समस्याआें से उलझते हुए भी आपने जीवन में सफलता की उंचाईयों को छुआ। केवल संस्तुत्य ही नहीं प्रेरणास्पद भी है। आपकी साहित्यिक यात्रा अनवरत चलती रहे यही कामना हैं सादर नमन
  • Mahavir Singh "सफर का सच --- २७" में सादर स्वागत है आपका आदरणीयLaxmanprasad Raamaanuj Ladiwala जी... आपको अनेकानेक शुभ कामनाएँ... 
    सादर वंदे...
  • Gurcharan Mehta Rajat आपका सफ़र का सच पढ़ा । अपने बारे में काफी जानकारी दी बहुत अच्छा लगा । वैसे तो मैं पहले से ही आपका फैन हूँ विशेषकर कुंडलियाँ छंद को लेकर । आपकी कुण्डलियाँ मुझे बेहद पसंद आती हैं अगर यह कहूँ की आपके छंद से बहुत कुछ सीखने को मिलता है तो कोई अतिशयोक्ति नही...See More
  • Mamta Ladiwal आदरणीय, आप जैसे सशक्त इंसान की बेटी होने पर गर्व है मुझे...जीवन के मुश्किल रास्तों से हो कर जो मुकाम आपने प्राप्त किया है वो समाज के लिये प्रेरणा स्रोत का काम करेगा , इस सच के सफर को बहुत हद तक मैंने देखा है स्वयं इसलिये सवाल नहीं है कोई बस आप का आशीष बना रहे सदा... 
  • Piyush Parashar इतने संघर्ष के बाद भी आपके हौसले बुलंद रहे, मेहनत और लगन की तो मिसाल देनी पड़ेगी। आपके आलेख और आपके बारे में पढने के बाद मेरे अन्दर एक असीम जोश का अनुभव हो रहा है। आपके व्यक्तित्व को सादर प्रणाम और इस लगन और लेखन के लिए हार्दिक शुभकामनाएं
  • Gurcharan Mehta Rajat आज सच का सफ़र में आपने बताया कि जहाँ आपने समाज में फ़ैली कुरीतियो के खिलाफ आवाज़ उठाई वही आप साहित्य से भी जुड़े रहे । इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है जीवन के इस संघर्ष में आप हमारे , नई पीढ़ी क्व प्रेरणा स्त्रोत हैं , मुझे तो लगता है कि अगर जिंदगी में आगे बढ़ने में कोई मुश्किल आये तो एक बार आपका यह सच का सफ़र पढ़ लिया जाए । बड़ी हिम्मत मिलेगी । सादर नमन है आपको ।
  • Gurcharan Mehta Rajat और भी एक बात आपसे मिलने की बहुत इच्छा थी आपका आशीर्वाद पाने की । जब भी आप आये ममता जी के पास हमें अवश्य सन्देश दें । यहाँ आपके फैन्स की बहुत लंबी लिस्ट है सभी आपसे मिलना चाहते हैं आपसे आशीर्वाद लेना चाहते हैं
  • Ashwani Kumar हार्दिक स्वागत आपका आदरणीय Laxmanprasad Raamaanuj Ladiwala जी, मंच का आभार सफ़र का सच के माध्यम से आज आप जैसी शसक्त शख्शियत से मुलाकात कर आपको और करीब से जानने का ।
    नतमस्तक हूँ आपके ठोस तथा कर्मठ व्यक्तिव के समक्ष,आप जिस विश्वास,मेहनत, धर्य और समाज सेवा
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  • Laxmanprasad Raamaanuj Ladiwala आदरणीया दीपिक द्विवेदी दीप जी --- 
    गुरुजन से ही सीखते, मिली मुझे सौगात,
    दीप सूर्य के सामने, रखता क्या औकात |--हार्दिक आभार Deepika Dwivedi Deep जी| सादर
    23 hrs · Like · 6
  • Laxmanprasad Raamaanuj Ladiwala आदरणीया दीपिका जी, SMS Hospital में मेरे नाना जी मुझे कुछ कहानियाँ सुनाकर हिम्मत दिलाते रहते थे | डॉ सेन मुझे ठीक होने का दिलासा देते रहते थे | मेरे पिताजी कहते थे पूर्व जन्म के संस्कार थे जो भोगने पड़ते है बाद में इश्वर ही ठीक करता है | ये बाते मुझे आश्वस्त करती रही | -------------------------------------
    23 hrs · Like · 4
  • Laxmanprasad Raamaanuj Ladiwala आद दीपिका जी, स्कूल में राष्ट्र कवि मैथिलि शरण गुप्त की एक रचना को आधार बनाकर १९६४ में जवाहर लाल नेहरु पर श्रद्धांजली स्वरूप रचना समाज की मासिक पत्रिका "अग्रगामी" में बाल रचना में छपी ने मुझे प्रोत्साहित किया | उसी वर्ष अग्रवाल कॉलेज में मेरा आलेख "विश...See More
    23 hrs · Like · 5
  • Laxmanprasad Raamaanuj Ladiwala श्री Rajesh Kummar Sinha जी, मेरे चाचा अग्रवाल समाज में और राजस्थान सराफा संघ में महामंत्री थ, उनसे प्रेरित होकर नवयुवक संगठन में कार्य करते हुए सामाजित संस्थाओं में रुझान हुआ और अग्रवाल समाज के पेरेंट बॉडी में निर्वाचित होने पर सम्पादक जी ने मुझे सहसंपादक बनाया तब सामाजिक लेख लिकहने व दहेज़ विरोधी आन्दोलन में सक्रीय भूमिका निभाने की इच्छा जाग्रत हुई |
    23 hrs · Like · 6
  • Prahlad Pareek बहुत सुन्दर और सहज आलेख है आपका फेस बुक पर चंद लोग है जो सभी की रचनाओ को पढ़कर मार्गदर्शन करते है उनमे आप भी एक है 

    आपका लेखन सचमुच अनुपम है सचमुच प्रेरणा देता है आपका ये आलेख आप सभी का पथ प्रदर्शन करते रहे सादर नमन लडीवाला सर
    23 hrs · Unlike · 7
  • Rajesh Kummar Sinha आ लक्ष्मणप्रसाद रामानुज लाड़ीवाला जी ,,,नमन ,आपकी कर्मठता और जीवन के आपके अनुभवों से रूबरू होना एक सुखद अनुभव सा लग रहा है ,,,और इसके साथ ही एक सवाल मेरे मन मे आ रहा है की ,,जब हमारे सामने सारी की सारी परिस्थितियाँ प्रतिकूल दिख रही हों तो ऐसी स्थिति मे ,,भी सामान्य बने रह कर आगे कैसे बढ़ा जाये ,,,अगर कुछ प्रकाश डाल सकें तो खुशी होगी ,नमन
    23 hrs · Like · 4
  • Laxmanprasad Raamaanuj Ladiwala आद दीपिका जी, मेरा मानना है कि नै पीढ़ी बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है,नई नई तकनीक और उनकी ऊर्जा को सही दिशा प्रदान करे तो यह समाज देश में क्रान्ति लाने में सक्षम है और भारत विश्व का अग्रणीय राष्ट्र बन सकता है और बढ़ भी रहा है | नई पीढ़ी को सही दिशा, सार्थक स...See More
    23 hrs · Like · 3
  • Laxmanprasad Raamaanuj Ladiwala भाई श्री Surendar Nawal जी,"आपके इस आलेख से आपके सम्पूर्ण जीवन की एक झलक सहज ही प्राप्त हो रही है और प्राप्त हो रही है एक झलक आपके हौसलों की" आपके ये शब्द ही नई पीढ़ी को प्रेरणा देने के में सक्षम है | मेरी तो शारीरिक कमी ने ही मुझे संघर्ष करने को प्र...See More
    23 hrs · Like · 3
  • Laxmanprasad Raamaanuj Ladiwala आद दीपिका जी 1964 में पहली बाल रचना थी - 
    देख तुम्हारे घुन विभव को, 
    जग उदास है खोकर तुमको |
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    23 hrs · Like · 3
  • Laxmanprasad Raamaanuj Ladiwala हार्दिक आभार आदरणीया रेखा गुप्ता जी | सादर मै तो अभी सीख ही रहा हूँ
    23 hrs · Like · 3
  • Kavi Pramod Shahu आदरणीय लक्ष्मण प्रसाद रामानुज लाड़ीवाल जी सर्वप्रथम मै क्षमा चाहता हूँ , व्यस्तता के कारण कल मै विमर्श में सहभागी नहीं हो सका। आदरणीय आपका सफर का सच पढ़ा। विषम परिस्थितियों की भट्टी में तप कर आप कुंदन सा निखरते गये और उन्नति के सोपान चढ़ते आज इस मकाम पर...See More
    23 hrs · Like · 5
  • Laxmanprasad Raamaanuj Ladiwala हृदय से आपका हार्दिक आभार श्री Subhash Saluja जी | सादर
    23 hrs · Like · 3
  • Laxmanprasad Raamaanuj Ladiwala बहुत बहुत आभार आदरणीया कविता सूद जी | प्रभु सभी को अवसर प्रदान करता है, उस अवसर को भुनाने के लिए हम तत्पर रहकर कितना उपयोग कर पाते है इस पर प्रगति निर्भर करती है | सादर
    23 hrs · Like · 4
  • Laxmanprasad Raamaanuj Ladiwala आपका बहुत बहुत आभार श्री महावीर सिंह जी | सादर
    23 hrs · Like · 3
  • Laxmanprasad Raamaanuj Ladiwala श्री Gurcharan Mehta Rajat जी | दोहे लिखने की प्रेरणा openbooks online के प्र सम्पादक प्रभाकर जी, श्री अम्बरीश श्रीवास्तव जी, से मिली और फिर कुण्डलिया छंद मै 2 वर्ष से ही लिखने लगा हूँ, आपको पसंद है यह मेरा सौभग्य है | सामजिक जागरूकता में साहित्य का बड़ा योगदान है | सामाजिक पत्रिका से जुड़ने और सामाजिक कार्त्कर्ता होने के कारण मुझे दायित्व निर्वाह करने का अवसर मिला | आपका अतिशय आभार
    22 hrs · Like · 4
  • Laxmanprasad Raamaanuj Ladiwala Mamta Ladiwal जी, सिमित शक्ति से मैंने तुम्हे और दोनों पुत्रों को संस्कार दे पाया ये मेरे माता पिताश्री का और प्रभु के आशर्वाद का ही परिणाम है | मेरी इच्छा और शुभकामनाए है कि देश और समाज आप अपनी कलम से योगदान करती रहे |
    22 hrs · Like · 5
  • Laxmanprasad Raamaanuj Ladiwala भाई श्री Gurcharan Mehta Rajat जी, आप सभी सहृदयी साथियों से मिला मेरा सौभाग्य ही होगा | मुझे भी प्रसन्नता होगी | सादर
    22 hrs · Like · 3
  • Laxmanprasad Raamaanuj Ladiwala श्री Ashwani Kumar जी, सादर नमस्ते | सामाजिक दायित्व और साहित्यिक सेवा सब संस्कार और प्रभु के आशर्वाद से ही निर्वाह कर पाया हूँ और नै पीढ़ी को एक वाक्य में सन्देश दे तो "हिम्मते मरदे मददे खुदा" | सादर
    22 hrs · Like · 4
  • Ashwani Kumar बहुत सत्य कहा आपने आदरणीय Laxmanprasad Raamaanuj Ladiwala जी, वाकई जीवन संघर्ष में यह ही सफलता का एक मूलमंत्र है और आपका सफ़र इस मन्त्र का निश्चय ही एक सफल उदहारण भी ।आपका सतत सामाजिक दायित्व के प्रति सजग रहना और इसके प्रसार के लिए साहित्य के माध्यम से ...See More
    21 hrs · Unlike · 5
  • Deepika Dwivedi Deep @Laxmanprasad Raamaanuj Ladiwala जी नमन ,नमन ,नमन आपके जीवन से सभी लोग बहुत कुछ सीख सकते है .मैं आपसे यह विनती करती हूँ कि आप अपनी आत्मकथा क्यूँ नहीं लिखते ?निश्चित रूप से यह आधुनिक पीढ़ी व् निराश युवाओं में नवीन उर्जा का संचार करेगी .अगर आप न लिख सके त...See More
    19 hrs · Edited · Unlike · 6
  • Surendar Nawal आपने जिस सहज भाव से सभी के प्रश्नों पर अपने विचार रखते हुए सभी का जिस प्रकार से मार्गदर्शन किया है वो हृदय स्पर्शी है Laxmanprasad Raamaanuj Ladiwala जी... सादर साधुवाद आपको... सादर वंदे...
    19 hrs · Unlike · 2
  • Surendar Nawal आपके जीवन की विभिन्न विषम परिस्थितियों से इस आलेख के माध्यम से साक्षात्कार करने के उपरांत जीवन की चंद कटु समृतियाँ एक ओर जहाँ नयनों की पुतलियों को नम कर गई वहीं दूसरी ओर एक सोच को दृढ गई कि हौसले कभी नहीं हारते हैं बल्कि हारता है तो जीवन का कपट-काल जो ...See More
    18 hrs · Unlike · 3
  • Mahavir Singh अदम्य साहस और आत्मविश्वास से भरपूर व्यक्तित्व के धनी आद.Laxmanprasad Raamaanuj Ladiwala जी , आपसे इस गतिविधि के माध्यम से मिलकर अपने आप को धन्य महसूस कर रहा हूँ । आपके 'सफर के सच' को पढ़कर बहुत प्रेरणा मिली । शत-शत नमन करता हूँ आपके अति प्रेरणादायी आलेख व जुझारू व्यक्तित्व को _/\_
    18 hrs · Edited · Unlike · 4
  • Surendar Nawal साहित्य से सम्बंधित प्रश्नों को रखने से पूर्व अपनी जिज्ञासा के तहत एक अन्य प्रश्न और... 

    प्रारंभिक एक वर्ष में तीन कक्षाएं उत्तीर्ण करना  आज के युग में कई लोगों को अटपटा लग सकता है लेकिन इस सत्य को मैंने अपने दौर में देखा और जिया है... यहीं से स्पष्
    ...See More
    18 hrs · Like · 3
  • Rajkumar Dhar Dwivedi आपके बारे में जानकर बेहद खुशी हुई। परिस्थियां बाधक थीं, लेकिन आप रुके नहीं, बल्कि अनवरत बढ़ते गए। छोटी नौकरी से शुरुआत करके उच्च पद पर पहुंचे, सामाजिक बुराई दहेज़ का विरोध किया। अब साहित्य-साधना में लीन हैं। बेहतरीन और प्रेरक सफर है आपका, बधाई।
    16 hrs · Unlike · 4
  • Laxmanprasad Raamaanuj Ladiwala हार्दिक आभार आपका श्री जी Prahlad Pareek जी और श्री Rajkumar Dhar Dwivedi जी | सादर
    14 hrs · Like · 1
  • Laxmanprasad Raamaanuj Ladiwala श्री Rajesh Kummar Sinha जी, परिस्थितिया प्रतिकूल हो तो भी धैर्य न खोकर जो कुछ हो सकता है करते रहने में सलंग्न रहे तो मानसिक तनाव कम होता रहेगा | इसके लिए दो बाते ध्यान में रखनी होगी - 1. होवे वही जो राम रची राखें, क्योंकरि तर्क बढ़ावही शाखा 2. हिम्मते मरदे मददे खुदा |
    13 hrs · Like · 2
  • Laxmanprasad Raamaanuj Ladiwala भाई श्री सुरेन्द्र नवल जी, मै तो यह मानता हूँ कि काम ही पूजा है | आम चुनाव में लेखा एवं भुगतान प्रकोष्ठ के प्रभारी के रूप में ऐसे कार्य करना पडा जैसे कोई बेटी के शादी कर रहा हूँ, और तत्क्लालिन कलक्टर ने श्रेष्ठ कार्य का प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया |...See More
    13 hrs · Like · 2
  • Surendar Nawal बहुत ही सुन्दर बात कही है आपने Laxmanprasad Raamaanuj Ladiwala जी... सच कहा आपने कि जो व्यक्ति कर्मठ होता है वो अपने कर्तव्यों को इसी प्रकार पूरा करता है जैसे बेटी की शादी हो... सादर साधुवाद आपको... सादर वंदे...
    13 hrs · Unlike · 1
  • Surendar Nawal एक आई. ए. एस. अधिकारी के रूप में समाज की स्थिति से आप कितने संतुष्ट हैं Laxmanprasad Raamaanuj Ladiwala जी? साहित्य के समाज को योगदान को आप किस प्रकार से देखते हैं?
    13 hrs · Like
  • Mahavir Singh आद. Laxmanprasad Raamaanuj Ladiwala जी, क्या आपने कभी महसूस किया कि विपरीत परिस्थितियों में मनुष्य के अन्दर का रचनाकार भी इनसे पार पाने में/लड़ने में सहायक होता है ? सादर नमन ...
    13 hrs · Unlike · 1
  • Gp Pareek नमन करता हू सर आप को ....संघर्षो को जीने वाले तप:पूत ऋषि है आप ...आप की रचनाये भी इसी भावना की सम्वाहक कई बार बनती दिखी है मुझे ...सादर नमन ...!!
    13 hrs · Unlike · 2
  • Jyotsna Saxena सादर वंदन ,,,, अभिनन्दन आदरणीय ,,,,सचमुच बहुत ही भाग्यशाली हूँ कि कल ही आपको मित्र सूची में जोड़ा ,,,, और आज आपसे साक्षात मुलाकात हो गई ,,,,, वो भी साहित्यिक माहौल में ,,,,, आपके सहज और गरिमामय व्यक्तित्व के साथ अपने को गौरान्वित महसूस कर रही हूँ ,,,, नमन
    13 hrs · Unlike · 2
  • Laxmanprasad Raamaanuj Ladiwala आपको अतिशय आभार श्री Mahavir Singhजी, श्री Gp Pareek जी और आदरणीया Jyotsna Saxena जी | जी महावीर सिंह जी, एक चिंतनशील रचनाकार को विपरीत परिस्थिति में धैर्य से चिंतन मनन कर परिस्थिति से पार पाना की राह बनानी होती है, अपनी कमी को स्वीकार कर दूर करने पर ही आगे बढ़ सकता है | सादर
    12 hrs · Like · 1
  • Deepika Dwivedi Deep सर कुछ भ्रम है कृपया स्पष्ट करे हमने आपके वक्तव्य से अर्थ निकाला कि आप कलक्टर जयपुर रह चुके है ,हम गलत तो नहीं है ,क्योंकि आपने बाद में कहा कि आप लेखाकार के रूप में भी कार्य कर चुके है ,कलक्टर ने सम्मानित किया ,कृपया स्पष्ट कीजिये
    12 hrs · Unlike · 1
  • Laxmanprasad Raamaanuj Ladiwala श्री Surendar Nawal जी, मै एन सी सी में क. लिपिक, पुनर्वास में चयनित वरिष्ठ लिपिक, RPSC से प्रतियोगिता उत्तीर्ण कर कलक्टर जयपुर में तहसील राजस्व लेखाकर, जिला कोषालय , सचिवालय,कलक्टर जयपुर और राजस्थान विधान सभा में लेखाकार एवं स. लेखाकारी के वेतनमान में कार्यरत रहकर सेवा निवृत हुआ हूँ | R.A.S परीक्षा उत्तीर्ण कर प्रतीक्षा सूचि में रहा | मैंने आईएस का तो कभी प्रयास ही नहीं किया | पूर्व में जिलाधीश कार्यालय लिखा जाता था जिसमे शामंतशाही की बू आती थी, इसलिए राजस्थान सरकार ने कलकटर, जयपुर कर दिया था, आपको और आदरणीया Deepika Dwivedi Deep जी इसलिए शायद यह भ्रम हुआ है | रात्री को मुझे मेरी बिटियाँ ने सूचित किया की आद दीपिका जी कलक्टर, जयपुर को कार्यालय की जगह पद समझ बैठी है | अच्छा हुआ जो मुझे स्पष्टीकर्ण कर भ्रम दूर करने का अवसर मिला | आखिर सफ़र के सच में सच उजागर होना नितांत आवश्यक है | आप दोनो का और मंच के सभी सहृदयी मित्रों का हार्दिक आभारी हूँ | सादर

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