Wednesday, March 6, 2013


जागरूक कर जाय  
लूट व् भ्रष्टाचार से, भरा पड़ा अखबार,
ह्त्या, बलात्कार की, ख़बरे है भरमार ।
घोटालों भरमार है, जनता को सब भान
जाँच करा बसते भरे,ये सरकार की शान ।

सुर्खियों में रहना ही, नेता समझे शान,
चर्चा में हरदम रहे,  नेता उसको जान  । 

खबर गर मजेदार है ,सच की क्या दरकार
संस्कृति व साहित्य से, नहीं अब सरोकार ।

जनहित सोंच खबर छपे, इसकी ही दरकार,   
जनजन को चेतन करे,वह असली अखबार ।

जनता में जागृति भरे, खबर सजग करजाय, 
जनसत्ता को सजग करे, चौथा स्तम्भ बताय ।
जनहित में खबरे छपे, इसकी ही दरकार,   
जनजन को चेतन करे,वह असली अखबार ।

-लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला  

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