मन में भरे मिठास
धन की खटिया छोड़ दे, मोह नहीं रख पास
तन मन चंगा रख सके, मन में भरे मिठास |
समय मौत ग्राहक कभी, आ टपके अनजान
इन्तजार करना नहीं, इनकी फिदरत जान |
मात पिता स्व यौवन का,सदा करे सम्मान,
जाने पर फिर ना मिले,सहजे रखकर ध्यान |
छोडो चिंता अतीत की, चिंतन में हो आज,
समय व्यर्थ गँवाय नहीं, झट निपटावे काज |
उत्तम संग संगीत का, संत संग हो बात,
दोस्त बने सह्रदय के, दुनिया को दे मात |
विद्या श्रम अरु प्रभु में, सतत रहे संग्लन
उन्नति का ये मार्ग है, करे हमेशा यत्न |
इनको कम ना आंकिये, रोग शत्रु अरु कर्ज
वश में इनको रख सदा, काम क्रोध का मर्ज |
लोभ क्रोध अरु बदचलन, कर देते कमजोर,
आत्मबल कमजोर करे, मन में बैठे चोर |
(मौलिक व् अप्रकाशित)
-लक्ष्मण प्रसाद लडीवाल
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