Thursday, August 29, 2013

बिन माटी सब शून्य

बिन माटी सब शून्य

धरती तो आधार है, जा न सके उस पार
जन्म,मरण अरु परण का,धरती ही आधार|

पञ्च तत्व से जन्म ले,पाय धरा की गोद 
हरेभरे उपवन खिले, प्राणी करे प्रमोद |

धरती गगन जहां मिले,लगे नीर की झील
हिरन दौड़ते खोजने, निकले मीलो मील |

हीरे मोती कुछ नहीं, जितनी धरा अमूल्य,
सभी मिले भूगर्भ में, बिन माटी सब शून्य|

निर्धन या धनवान हो, दो गज मिले जमीन,
साँसों की डोरी थमे, जाय  संपदा  हीन |

 -लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला

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